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Joke

Hindi hardcore story

इंडियन सुहागरात स्टोरी में पढ़ें कि मेरी शादी के बाद जब मेरे पति कमरे में आये तो उन्होंने क्या किया. मेरी सहेलियों ने जो सुहागरात का बताया था ऐसा कुछ हो नहीं रहा था.

दोस्तो, एक बार फिर आपका प्यारा शरद एक बार फिर से इंडियन सुहागरात स्टोरी के साथ आपके सामने हाजिर है।
कहानी के टाईटल के अनुसार कहानी में नायक की जगह नायिका है।
इस लॉक डाउन के कारण मेरे मसष्तिक में इस इंडियन सुहागरात स्टोरी का विचार कौंधा और मैं लिखने बैठ गया।

तो मेरे दोस्त और सहेलियो, एक बार फिर आप अपने अपने औजारों का प्रयोग करना शुरू कर दो।
इस कहानी की नायिका रूपाली है। यह कहानी पूर्ण रूप से काल्पिनक है और इस कहानी का वास्तिवकता से कोई लेना देना नहीं है।

तो चलिये रूपाली की जुबानी ही कहानी शुरू करते हैं।

हाय दोस्तो, मेरा नाम रूपाली है। मैं पांच फिट चार इंच लम्बी हूं। मेरी शादी को अभी छ: ही महीने हुए हैं। इसलिये अभी मेरे जिस्म के आकार में ज्यादा परिवर्तन नहीं हुआ है। बस 34-30-34 का फिगर है।

मेरे पति एक सरकारी कर्मचारी हैं। मेरा भरापूरा ससुराल है। पति भी मस्त है और चुदाई भी बढ़िया करता है।
बस कमी है उस तरीके के चुदाई की … जैसा कि मैं कहानियों में या औरों के मुंह से सुनती हूं कि आज घोड़ी बनाकर चोदा या आज मेरे पति ने या ब्वॉय फ्रेंड ने मुंह को ही चोद दिया, वगैरह वगैरह।

इधर मेरे पति तो चुदाई बढ़िया करते हैं. लेकिन उस चुदाई की तरह नहीं।

सुहागरात की रात मेरे पति आये। मेरे पास बैठे, मुझे अपनी बांहों में भर लिया और मेरी बांहों कि सहलाते हुए मुझे अपने परिवार के बारे में और मेरी जिम्मेदारी के बारे में बताने लगे।
हालाँकि मेरे परिवार के बारे में भी पूछा और अपनी जिम्मेदारी भी बताई. पर अभी वो नहीं कर रहे थे जो सुहागरात को करना चाहिये था।

जबकि मेरी सहेलियाँ बताती नहीं थकती थी कि उनके सुहागरात वाली रोज क्या क्या हुआ था। साथ ही सतर्क किया था कि दारू पीकर आये तो बुरा नहीं मानने का; क्योंकि उसके बाद तो वो कुत्तों की तरह जिस्म कहाँ-कहाँ चाटते हैं कि जिस्म थर्रा जाता है।

खैर धीरे-धीरे बातें करते हुए उन्होंने मेरे सर का पल्लू हटाकर मेरे शृंगार को अलग किया और मेरी छाती से साड़ी को किनारे करके मेरे ब्लॉउज का हुक खोलकर मेरी ब्रा को मेरी चूचियों से ऊपर करके मेरे छोटे-छोटे निप्पल को पीने लगे.

और फिर नीचे से मेरी साड़ी और पेटीकोट को मेरी कमर पर लाकर मेरी पैन्टी के ऊपर से ही मेरी चूत पर थोड़ी देर तक हाथ फिराते रहे।

मैं उनके स्पर्श को अपने ऊपर इस तरह पाकर बहुत ही रोमांचित होने लगी.
कि तभी उन्होंने मेरी पैन्टी उतार दी।

मैंने शर्म के मारे अपनी आँखें बन्द कर ली।

मेरे पतिदेव मेरे ऊपर चढ़ गये और मेरे दोनों चूचियों को बारी-बारी से चूसने लगे।

कुछ देर बाद मुझे कुछ बहुत ही गर्म चीज चूत के मुहाने पर महसूस हुयी।
शायद उनका लंड था।
शायद क्या … उनका लंड ही था जिसको मेरे पतिदेव मेरी चूत पर रगड़ रहे थे.

अचानक उनका गर्म लंड मेरी चूत के अन्दर मुझे फंसा हुआ सा महसूस हुआ और मुझे लगा कि कोई ब्लेड मेरी चूत के अन्दर चल रहा है और उस कटी हुई जगह से खून निकल रहा है।
मैं उस जलन को बर्दाश्त नहीं कर पायी और मेरे मुख से चीख निकल गयी। तभी उनका हथेली ने मेरे मुंह को दबा लिया।

फिर उन्होंने मुझसे फुसफुसाते हुए कहा- थोड़ा बर्दाश्त करो और चिल्लाओ नहीं! नहीं तो बाहर से आवाज आने लगेगी।
कहकर वो एक बार फिर मेरी चूची पीने लगे।

उनके इस तरह करने से मुझे थोड़ी देर बाद राहत मिल गयी. और मुझे शिथिल जानकर एक बार फिर से उन्होंने मेरे ऊपर चढ़ाई कर दी.
लेकिन इस बार वो बहुत ही एहितयात से कर रहे थे. जिससे मुझे हल्के दर्द के साथ मजे आने शुरू हुए।

करीब 15-20 मिनट तक वो मेरी चुदाई करते रहे और फिर अपना गर्म लावा मेरी चूत के अन्दर डालकर किनारे हो गये।
मुझे भी खूब मजा आया। मेरे जिस्म के एक-एक अंग को निचोड़ कर रख दिया था।

मेरा पानी निकलने के बाद ही उन्होंने अपना लावा मेरे अंदर डाला. लेकिन इसके बावजूद मुझे कुछ कमी लग रही थी।
हालांकि मुझे मेरी चूत बजने का बड़ा मजा आया।

दूसरी रात भी आयी.
हम लोगों के बीच प्यारी-प्यारी और मीठी-मीठी बातें हुयी.

और उसके बाद फिर वही हुआ. पति ने मेरा ब्लॉउज खोला, निप्पल चूसे, साड़ी को कमर तक उठाया, पैन्टी उतारी और अपने गर्म लंड को मेरी चूत में डालकर चूत को मथनी की तरह मथने लगे।
इसी तरह होते-होते चार दिन कब बीत गये, पता ही नहीं चला।

मैं इतना कह सकती हूं कि मजा तो बहुत था इस चुदाई में! भले ही मैंने लंड के दर्शन नहीं किये हों.

मैंने ही क्या … मेरे पति ने भी मेरी चूत के दर्शन नहीं किये होंगे. क्योंकि वो मुझे चोदते समय मेरी निप्पल को ही चूसते थे, नीचे मेरी चूत की तरफ उतरे ही नहीं।
चोदा और फिर सो गये।

खैर पहली विदाई के बाद मैं घर आ गयी।
मेरी सहेलियाँ मुझसे मिलने के लिये आयी।

अपने कमरे में मैं अकेली थी. उन्होंने दरवाजा बन्द किया और सभी ने मुझे कस कर पकड़ लिया.

मैं कुछ बोलती … इससे पहले एक बोली- चुपचाप पड़ी रहो, फिर बात करेंगे।

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